Monday, February 6, 2017

भांट-चाकर

राजा के कई भांट-चाकर
करते हैं गुणगान जाकर
बख्शीष में अशर्फियां पा कर
ब्लैकमेलिंग के पैसे खा कर
जेल जा कर, रेल जा कर
ओहदा पा कर, तेल पा कर
झूठ, झमेले, भ्रम फैलाकर
करते हैं गुणगान जा कर
राजा के सब भांट-चाकर

होना पड़ता है

कुछ रूठा कुछ टूटा होना पड़ता है,
कुछ सच्चा कुछ झूठा होना पड़ता है
ये रोग मुहब्बत का कुछ होता ऐसा है
कुछ हंसना, कुछ पल खातिर रोना पड़ता है
पल-पल सदियों जैसा कुछ लगता रहता है
धड़कनों से दिल भी कुछ कहता रहता है
रिश्ता ये गल्ले का हिसाब नहीं होता
इश्क में कुछ पाना, कुछ खोना पड़ता है

कोहरा घना है

    कोहरा घना है
सूरज सांसें रोक रहा है
आसमान भी अनमना है
कोहरा घना है 
राहें ओझल-ओझल सी हैं
आहें बोझिल-बोझिल सी हैं
सिमट रहे अलाप मन के
कोहरा न जाने किसने जना है
कोहरा घना है
कोहरे में डूबे में दिग-दिगंत
इस कोहरे का आदि न अंत
सिमट रहे संबंध विस्तार
सच है, सच कहना मना है
कोहरा घना है

आपकी बात

     
लोकतंत्र है ये अपना जनतंत्र है
खास आदमी से आम तक स्वतंत्र है
देश आम आदमी का बचा नहीं
सत्ता आम आदमी ने रचा नहीं
खास लोग, खास पूंजीतंत्र गढ़ रहे
लोकतंत्र को हवेलियों में मढ़ रहे
आओ देश को बचाने की बात हो
लोकतंत्र आम आदमी के हाथ हो
आम आदमी की बात हो
आम आदमी के साथ हो
वीर हमीद की कुर्बानी की कसम
आज़ाद, भगत सिंह की रवानी की कसम
है वतन का नाज तो नाज सबका है
बापू के सपनों का स्वराज सबका है
अंबेडकर के आदर्शों का समाज हो
आम आदमी की बात हो
आम आदमी के साथ हो
लोहिया, लिमये हर दिल में बसें
चारु-कानू मिलकर अब समाज को रचें
मदर टेरेसा, बाबा आम्टे का देश है
संत विनोबा, जय प्रकाश का संदेश है
भूख-गरीबी फिर कल की बात हो
धाक हो हमारी और साख हो
आम आदमी की बात हो
आम आदमी के साथ हो

Wednesday, December 7, 2016

संघवाद के खिलाफ

गर तुम हिटलर के नाती हो, हम भी बापू के पोते हैं
आज़ाद चंद्रशेखर की आवाज़, भगत सिंह की थाती हैं।
सुन ले गोडसे की पीढ़ी तुम, हम राम-बुद्ध के वंशज हैं
तुम बिन तुगलक गर बनते हो, हम कौटिल्य शिखा लहराते हैं
तेरी हर साज़िश को प्रण से मिट्टी में हम मिलाते हैं।
गर तुम छप्पन ईंची छाती हो, हम भी हिंदुस्तानी माटी हैं
हम गंगा-जमुना की लहरें, गीता-कुरान से पोथे हैं
गर तुम हिटलर के नाती हो, हम भी बापू के पोते हैं।

सीधी बात

सीधी बात
न मोहब्बत के दिन हैं येन विरहा की रात है
मैं तुम्हे याद करता हूं
सीधी सी बात है
ना नसों पर ब्लेड चलती है
ना ही शिकवे-शिकायत है
मैं तुम्हे याद करता हूं
सीधी सी बात है

उनींदी रात को जब भी
अकेलेपन ने मुझे घेरा
दिन के उजाले में मतलबी भीड़ का डेरा
चला गया कोई भी नस्तर दिल में चुभाकर
जाना यही हक़ीक़त
नहीं इसमें जज्बात है
मैं तुम्हे याद करता हूं
सीधी सी बात है
मुझे याद है वो दिन
जब मिले थे हम और तुम
न सीधा जान पाए थे
न हम पहचान पाए थे
फिर सिलसिला कुछ यूं ही चल पड़ा था शायद
बस इसी तरह वो दिन मुझको याद है
मैं तुम्हे याद करता हूं
सीधी सी बात है
तुम्हें भी याद हैं वो दिन
तुम्हें भी मैं याद आता हूं
बस इसी भरोसे को ओढ़ता-बिछाता हूं
यकीं ये भी है मुझको
तुम्हें शिकवा नहीं मुझसे
बस इतनी सी बात है
मैं तुम्हें याद करता हूं
सीधी सी बात है

सच्चा-झूठा

कुछ रूठा कुछ टूटा होना पड़ता है,
कुछ सच्चा कुछ झूठा होना पड़ता है
ये रोग मुहब्बत का कुछ होता ऐसा है
कुछ हंसना, कुछ पल खातिर रोना पड़ता है
पल-पल सदियों जैसा कुछ लगता रहता है
धड़कनों से दिल भी कुछ कहता रहता है
रिश्ता ये गल्ले का हिसाब नहीं होता
इश्क में कुछ पाना, कुछ खोना पड़ता है

ये बजट अहम है क्योंकि हालात बद्तर हैं

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है कि ये बजट देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने ये बात यूं ही नहीं कही है। वर्ल्ड बैंक के अ...